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लातेहार( प्रकृति की हृदय स्थली)

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                            लातेहार        स्थापन वर्ष               -  4 अप्रैल 2001 ई. मुख्यालय                 -लातेहार समुद्र तल से ऊंचाई   - 387 मीटर(1270 फिट) कुल क्षेत्रफल            -  3622 वर्ग किलोमीटर पुरुष जनसंख्या        - 369666 महिला जनसंख्या      - 357312 नगरीय आबादी         -51858 नगरीय आबादी का प्रतिशत   -7.13 ग्रामीण आबादी     - 675120 ग्रामीण आबादी का प्रतिशत  - 92.87  वाहन निबंधन संख्या   - JH-19 अनुमंडलों की संख्या      - 2(लातेहार, महुआडांड़) प्रखंडों की संख्या   - 10(बरवाडीह,गारू,         महुआडांड़,मनिका, लातेहार, बालूमाथ, बारियातू, हेरहंज,चंदवा,सरजू) विधानसभा क्षेत्रों की संख्या  ...

खूंटी (लाह नगरी)

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 लाह नगरी, भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि (खूंटी) पंचघाग झरना                                   बिरसा मृग विहार पैरवा घाघ       बिरसा पार्क स्थापना वर्ष             12 सितंंबर 2007 मुख्यालय               खूूंटी कुल क्षेत्रफल           2611 वर्ग किलोंमीटर कुल जनसंंख्या            531885 वाहन निबंधन संख्या       JH-23 अनुमंडलों की संख्या        1(खूूंटी) वर्तमान समय में प्रखंडोंं की संख्या       6                                                                         विधानसभा क्षेत्रों की संख्या   ...

वर्दान या श्राप

राजा मिदास की कहानी हम सभी लालची राजा मिदास की कहानी जानते हैं। उसके पास सोने की कमी नहीं थी, लेकिन सोना जितना बढ़ता और अधिक सोना चाहता उसने सोने को खजाने में जमा कर लिया था, और हर रोज उसे गिना करता था, एक दिन जब वह सोना गिन रहा था, तो एक अजनबी कहीं से आया और बोला, "तुम मुझसे ऐसा कोई भी वरदान मांग सकते हो, "जो तुम्हें दुनिया में सबसे ज्यादा खुशी दे।" राजा खुश हुआ, और उसने कहा मैं चाहता हूं कि जिस चीज को छूऊं वह सोना बन जाए।" अजनबी ने राजा से पूछा क्या तुम सचमुच में यही चाहते हो?" राजा ने कहा, "हां", तो अजनबी बोला, "कल सूरज की पहली किरण के साथ ही तुम्हें किसी चीज को छूकर सुना बना देने की ताकत मिल जाएगी।" राजा ने सोचा कि वह सपना देख रहा होगा यह सच नहीं हो सकता लेकिन अगले दिन जब राजा नींद से उठा तो उसने अपना पलंग छुआ वह और वह सोना बन गया वह वरदान संस्था स्टॉप राजा नहीं जिस चीज को भी छुआ वह सोना बन गई उसने खिड़की के बाहर देखा और अपनी नन्ही बच्ची को खेलते पाया उसने अपनी बिटिया कोई अजूबा दिखाना चाहा और सोचा कि खुश होगी। लेकिन भविष्य में जाने से पह...

पूर्वी शिहभूम (धाल राजाओं की भूमि)

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 धाल राजाओं की भूमि,अंग्रेजों का प्रवेश  द्वार(पूर्वी सिंहभूम)           स्थापना          16 जनवरी 1990 मुख्यालय        जमशेदपुर            कुल क्षेत्रफल        3533 वर्ग किलोमीटर कुल जनसंख्या      2293919 वाहन निबंधन संख्या      JH-05 अनुमंडलों की संख्या       2 (धाल भूम,घाटशिला) वर्तमान समय में अनुमंडलों की संख्या    11 (बोडाम,पटमदा,गोलमुरी, सह जुगसलाई,पोटका,घाटशिला, मुसाबनी,डुमरिया, गुडा बांदा,धाल भूमगड़, चाकुलिया,बहरागोड़ा) विधान सभा क्षेत्रों की संख्या    6 (घाटशिला,पोटका, बहरागोड़ा,जुगसलाई,पूर्वी जमशेद,पश्चिमी जमशेद) लोकसभा संसदीय क्षेत्र         1(जमशेदपुर)

2022 में बढ़ेगी work from Home.

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  साल 2022 तक एक तिहाई कर्मचारी घर से करेंगे काम कोरोना महामारी ने वर्क फ्रॉम होम संस्कृति को जन्म दिया है। इसका फायदा दुनिया भर की कंपनियों और कर्मचारियों को हुआ है। रिसर्च फर्म गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार,अगले साल यानी 2022 तक एक तिहाई कर्मचारी घर से ही काम करेंगे।                                      रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2021 में 51 फीसदी कर्मचारी घर या आउट स्टेशन से काम करेंगे जबकि 2019 में यह आंकड़ा 27 फ़ीसदी ही था।              

गढ़वा (मां गढ़देवी की नगरी)

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                      स्थापना वर्ष  - 1 अप्रैल 1991      मुख्यालय    - गढ़वा      कुल क्षेत्रफल  -  4044 वर्ग किलोमीटर      कुल जनसंख्या  -  1322784      वाहन निबंधन संख्या  -   JH- 14      अनुमंडलों की संख्या   -  3 (गढ़वा,नगर उठारी, रंका)      जिला निर्माण के समय प्रखंडों की संख्या  -   8      वर्तमान समय में प्रखंडों की संख्या    -.     20       (खरौंधी,केतार, भवनाथपुर,बरडीहा, बिशनपुरा,नगर उंटारी संगमा,धुरकी,डंडई,चिनिया,मेराल,गढ़वा,डंडा,रमकंडा,भंडरिया, बढ़गढ़,) विधानसभा क्षेत्रों की संख्या - 2(गढ़वा,भवनाथपुर) लोकसभा संसदीय क्षेत्र   -   1(पलामू)

दुख मांजता है

 किसी न किसी तरह के दर्द से मानव जीवन का सामना होता रहता है। दर्द का एक नियम है और वह यह है कि हर दर्द विकास की ओर ले जाता है और मंजिल तक पहुंचाता है। प्रसिद्ध दार्शनिक जॉन मैकडॉवेल कहते हैं।, 'हर एक समस्या इंसान का परिचय खुद से कराती है।' जब भी व्यक्ति का सामना किसी तकलीफ से होता है, तब वह खुद को अच्छी तरह जानने लगता है। दर्द पर व्यक्ति की प्रतिक्रिया ही उसे आगे खड़े होने या पीछे रहने के लिए तैयार करती है। कोई भी व्यक्ति यह नहीं कहेगा कि उसे समस्याएं बहुत अच्छी लगती है समस्याएं उसके जीवन में आती रहे।पर कई व्यक्ति यह जरूर स्वीकार करेंगे कि दर्द के बीच उन्हें जीवन की सबसे बड़ी सफलता मिली। जीवन उतार-चढ़ाव भरा होता ही है, लेकिन मानव स्वभाव  केवल ऊपर उठना पसंद करता है ,यह संभव नहीं है। पक्षी की नियती उड़ान भरना है लेकिन जब वह उड़ना सिखता है तब बार-बार गिरता गिरता है‌। भिन्न-भिन्न रूपों से रूपों में कठिनाइयां हर किसी को मिलने ही है। और यह उसके अस्तित्व को बदल देते हैं। जीवन में घटने वाली ज्यादातर घटनाओं को नियंत्रित किया जाना असंभव है ।लेकिन उन पर होने वाली प्रतिक्रिया को परिपक्वता...